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नेपाल का इतिहास

History of Nepal History of Nepal mentioned an event of past on holy book, Puran, and chronicle about the origin of its Himalaya and Valley. An old tooth of Ramapithecus was discovered in 1932 by G. Edward Lewis. The discovery tooth of Ramapithecus was in the Shivalik hills nearby Lumbini (bank of Tinau River) that is believed 9 to 9.5 million years old. Nepal was frequented by hominoids 8 to 14 million years ago. The country called 'Satyavati' in the age of truth, 'Tapoban' in Treta, 'Mukti Sopan' in Dwapara and 'Nepal' in Kali (now). The Vedas guided four age cycles, including Satya Yuga with 17,28,000 years, Treta Yuga with12,96,000 years, DwaparaYuga with 8,64,000 years and Kali Yuga is 4,32,000 years periods. The earth calculated 4,32,0000000 years. The name 'Nepal' was traditionally applied only to Kathmandu Valley. The history begins in the Vedic period. The two dynasties, Gopal (cowherds) and Mahishapalas (buffalo-herds) ruled in Kat...

Rashboots ➡️ रासपूत ➡️ Rajpoot कौन हैं ?

 Rashboots ➡️ Rashpoots ➡️ Rajpoot Rashboots ➡️ रासपूत ➡️ Rajpoot कौन हैं ? वर्तमान में ज्यादातर सभी लोग जानते हैं कि एक समाज खुद को पुराण व मनुस्मिर्ति से जोड़कर खुद को क्षत्रिय का स्टेट्स देने के लिए कुछ ज्यादा ही अमादा या जो इंडिया के पुराने राजवंश हैं उनसे खुद को जोड़ने और उन सब पर एकमेव अधिकार के लिए यह प्रयास 16विं सदी से जारी है । इस सदी से पूर्व यहाँ राजवंश तो थे लेकिन बहुत बड़े नही भले ही वह इतिहासों में कितनी बड़ी सल्तनत के मालिक दिखाए लेकिन सच यह है कि ये बड़ा भूभाग अलग अलग जागीरदारों और जातियों का अलग अलग जगह पर प्रभाव रहता था या यु कहें कि ये उन जातियों का अपना एक देश होता था पूरे भारत पर 7विं सदी तक तो विशुद्ध रूप से आभीर कबीलों और कबीलाई संस्कृति का ही चलन था । इस 7विं सदी के बाद भी यहाँ राज तो रहा है इस संस्कृति का लेकिन सीमा बढ़ाने या देश को और ज्यादा समृद्ध बनाने के लालच ने इन कबिलाई लोगों में एक दूसरे से ही युद्ध शुरू हो गया और यही वक्त था बाहरी लोंगों का फायदा उठाने का । इतिहासकार यह मानते हैं कि जो बाहरी लोग यहाँ से व्यापार करते थे वह यहाँ की समृद्धि स...

Defence Between Geeta & Ramayana

हरे कृष्ण । भारत अर्थात #आर्यवर्त मनुष्य की उत्पत्ति का स्थान माना जाता है । अलग अलग इतिहासकारों ने इससे अलग अलग स्थान बताया है लेकिन #science और वेदों की माने तब यह स्थान कोई ऐसी जगह है जहाँ पानी हो पानी होगा तब बर्फ भी होगी । बर्फ हुई तो पहाड़ भी होंगे। पहाड़ हुवे तो जंगल भी होंगे । जंगल हुवा तब वह वह जगह है जो खूब हरी भरी है वहां पानी और सभी जीवन होने के तत्व प्रचूर मात्रा में होंगे । और पौराणिक भारत बहुत विशाल था । #अरावली ही सायद वह जगह है जहाँ आर्य / श्रेष्ठ मनुष्य ने धरती पर पहली बार अवतरण हुवा । जब पहली बार गीता सूर्यदेव को भगवान् ने सुनाई थी । उस के बाद यह त्रेता युग से पहले ही नष्ट हो गयी होगी । अर्थात स्मृतियों से भी । लोग हजारों देवो की पूजा खुद के उद्धार के लिए करने लग गए। जबकि गीता में सिर्फ एक परमात्मा की आराधना का ही उद्देश्य है । द्वापर युग इस धरती का स्वर्णिम युग है जब भगवान् सिर्फ धरती के लिए आये थे नाकि किसी अन्य उद्देश्य के लिए , अर्थात अपने भक्तों और धर्म की पुनः स्थापना के लिए । महाभारत के बाद यह कार्य हुवा भी । लेकिन भारत पर हमेशा आक्रमण होते रह...
जय यदुवंश गोवा के भोज एक राजवंश हैं जो गोवा और कोंकण के कुछ हिस्सों पर और कर्नाटक के कुछ हिस्सों को कम से कम तीसरी शताब्दी ईस्वी से लेकर 6 वें शताब्दी तक शासन कर चुके थे, गोवा भोज के राजनीतिक प्रभाव के तहत आए थे, जिन्होंने इस क्षेत्र को सामंतवाद की स्थापना में मौर्य पाटलिपुत्र का सम्राट या शायद शतावहंस के नीचे। भोज सीट का सत्ता चंद्रपुर या चंद्रारा (आधुनिक चंद्रोर) गोवा में स्थित था इतिहासिक भोज का सबसे पहला संदर्भ अशोक के साथ-साथ भव्य पुराण के रॉक संपादनों में पाया जाता है। [2] वे विदर्भ और द्वारका के यादवों से जुड़े हुए हैं, और माना जाता है कि उनके पास उतरे हैं। हालांकि उनका इतिहास बहुत ही अस्पष्ट है, तांबे-प्लेट और अन्य साहित्यिक ऐतिहासिक स्रोत उनके इतिहास पर प्रकाश डालेंगे चंद्रपुर के चन्द्रमंदला क्षेत्र के शासन के दौरान, उनके इलाके में गोवा, कर्नाटक के उत्तर केनरा और बेलगाम जिलों के कुछ हिस्सों का विस्तार हो सकता था। कुछ सूत्रों का कहना है कि वे सतावहना की सामंतताओं हो सकते हैं। [3] वे विदेशी व्यापार के लिए जाने जाते थे, और व्यापारियों के संगठनों का अत्यधिक आदेश दिया गया था...

Kaling Empire Of Yadavas

*****यादवों का कलिंग साम्राज्य***** वर्तमान उडीसा राज्य का अधिकांश भाग प्राचीन काल में कलिंग नाम से प्रसिद्द था. उस इतिहास प्रसिद्द कलिंग पर कभी यादवों का साम्राज्य था.  पहली सदी ई.पू.  तक कलिंग का यदुवंशी राजा खारवेल इस महाद्वीप का सर्वश्रेष्ट सम्राट बन  चुका  था और मौर्य शासकों का 'मगध'   कलिंग साम्राज्य का एक प्रान्त बन  चुका   था. इसका विवरण 'खारवेल का हाथीगुम्फा'  नामक  अभिलेख में मिलता है.    उस  अभिलेख में खारवेल का नाम विभिन्न उपाधियों, जैसे - आर्य महाराज, महामेघवाहन, कलिंगाधिपति श्री खारवेल,  राजा श्री खारवेल, लेमराज, बृद्धराज, धर्मराज तथा महाविजय राज आदि  विशेषणों के साथ उल्लिखित है। कलिंग राज्य एवं राजवंश की उत्पत्ति  के बारे में भली-भांति  जानने के लिए यादव  वंशावली के बारे में जानकारी आवश्यक है. इसलिए   निम्न  अनुच्छेद  में संक्षिप्त यादव वंशावली दी गई है:- "परमपिता नारायण ने सृष्टि उत्पति के उद्देश्य से ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया. ब्रह्मा से अत्रि का प्रादुर्भाव ...

Gomanta Kingdom Of Yadavas

#Yadav history #Gomanta  Yadav Kingdom #गोमांत महाभारत महाभारत में वर्णित राज्य था। यह द्वारका में #यादव के राज्य का विस्तार था। इसे पश्चिमी तट में स्थित गोवा राज्य भारत के रूप में पहचाना जाता है। महाभारत में स्पष्ट रूप से उल्लेख करते हुए यह क्षेत्र दक्षिणी का विस्तार, यादव परिवारों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। #महाभारत में गोमांत को प्राचीन भारत (भरत वर्ष) के राज्य के रूप में मंदाक, शांड, विदर्भ आदि के साथ उल्लेख किया गया था। वीर अहीर द्वारा गोमता साम्राज्य की स्थापना मगध राजा जरासंध के निरंतर हमले के कारण मथुरा के #यादव, शूरसेन अहीर साम्राज्य की राजधानी वहां से भाग गए थे। वे दूर दक्षिण तक गोमांत के रूप में पहुंच चुके हैं, आधुनिक भारतीय राज्य गोवा कहा जाता है। शूरसेन अहीर राज्य के अधर्म राजा, जैसे कंस अहीर वासुदेव कृष्ण द्वारा मारे गए थे कंस की पत्नियों  और  जहां मगध के बेटे, मगध के राजा, की बेटियां। उन्होंने कृष्ण के साथियों पर हमला किया यादव के अठारह छोटी शाखाओं से 18,000 भाई और चचेरे भाई के साथ यादव ने निष्कर्ष पर पहुंचे कि अगर वे लगातार लड़ते हैं तो...

Vedic Arya V's Only Arya V's MoolNivasi

वैदिक_आर्यं - चन्द्रवँशी पंचजन्य सिर्फ आर्य - सूर्यवंशी / अग्निवंशी या ब्राह्मणों के बनाये क्षत्रिय । द्रविड़ियन - यक्ष , राक्षस या मूल निवासी ये तीनो कौन है ? आज कल राजनीती की कारण लोग इस मुद्दे पर राज नीति करते है तब आप समझ सकते हैं भारत का भविष्य कैसा होगा । इसके लिए नासमझ लोगों को बहकाया जा रहा है और वह मानसिक तौर पर ग्रसित होते जा रहे है इसके लिए यह सच बोलती पोस्ट आपको सच का चेहरा दिखाएगी । सबसे पहले हमारा भारत पहले सीमाओं में नही था कि  लोग सीमाओं और देश के नाम से जाने जाएँ। लोग काबिले और संस्कृति से जाने जाते थे । और Middle East से इनका माइग्रेशन था । वह लोग देवता और गौ और पसु को  अपना सच्चा मित्र मानते थे जो एक बहुत बड़ा धन था । जब दुनिया में सिर्फ अनाज और दूध हो उस दुनिया की  कल्पना करो की कोण सबसे अमीर या धनि होगा । वह होगा जिसके पास अन्न हो या उसके पास जिसके पास चलता फिरता धन हो जिसे वह कहीं भी ले जा सके बड़ी आसानी से वह है पशु अर्थात गौ । Rigved में पंच जन्य या पांच क्षत्रिय कहे जाने वाले आर्यों का जिक्र है । जिनमे से यदु और पुरु आज के भारत ...

Regiment is Ahora Pride Not Reservation

अहीर रेजिमेंट स्वाभिमान की लड़ाई है यदुवंश की । नाकि आरक्षण की जय यदुवंश । एक वक्त वो था जब सबसे बड़ी #जातिगत सेना हमारी थी , और उस सेना से बड़ी आज इस युग में कोई सेना हो ही नही सकती । कुछ लोगों को जब #रेजिमेंट क्या है बताया जाये तो वो ये कह देते हैं कि आरक्षण है , आरक्षण जाति के लोंगो को व्यवसाय देने का उनको काम धंदा देने के लिए लड़ाई , अगर छोटी बुद्धही और खान दान न हो या जिस जाती का इस धरती के लिए जान का बलिदान कभी गया न हो सायद वही लोग यह बात करते हैं गौवरव और शौर्य जैसे शब्द बुस्दिलों के कुल को नही मिलते । सायद इसीलिए वह लोग इस #स्वाभिमान की लड़ाई को इतना छोटा बोल देते हैं । #भारत में अनुमानित अभी 26 करोड़ यादव हैं । और एक रेजिमेंट में 25,000 सैनिक होते हैं तो अब आप बोलॉगे की इतने छोटे #आरक्षण के लिए लड़ क्यों रहे हो ? मैंने कहा था न जिसके कुल का इतिहास न पता हो या रहा ही न रहा हो वह #स्वाभिमान जैसा शब्द सिर्फ खुद से जोड़ के देखता  है। मैं ज्यादा दूर नही सिर्फ आज के 300 सालों का शौर्य आपके सामने रखता हूँ । क्योंकि इतिहास के पन्ने खत्म हो जाएंगे पर यदुवंश का शौर्य नह...

अमरगाथा- महाराजा हरपालदेव यदुवंशी

महान हिंदू सम्राट #महाराजा वीर अहीर #हरपाल देव यादव की अमरगाथा ----------------------------- आज बात करेंगे भारत के सबसे महान हिंदू सम्राट देवगिरी साम्राज्य के अंतिम शासक चंद्रवंशी क्षत्रिय हरपाल देव यादव की जिनको मुस्लिम शासक खिलजी ने जलते तेल में डाल दिया तब भी इन्होंने अपना धर्म नही बदला । देवगिरि यादव राजवंश  850 से लेकर –1334 तक कायम रहा जिसने अपने चरमोत्कर्ष काल में तुंगभद्रा से लेकर नर्मदा तक के भूभाग पर शासन किया जिसमें वर्तमान महाराष्ट्र, उत्तरी कर्नाटक, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ भाग शामिल थे। उनकी राजधानी देवगिरि थी जिसका नाम मुस्लिम आक्रमणकारियो ने बदलकर दौलताबाद कर दिया था। 13वीं शताब्दी का अंतिम दौर मुस्लिम आक्रमणकारियों से ग्रासित रहा। इसी दौर में आक्रमणकारी अल्लाउद्दीन खिलजी ने आर्यवर्त को लूटने के नापाक मनसूबे से भारत विजय करने निकला था।। उस समय आर्यवर्त में देवगिरि यादव साम्राज्य सबसे बड़ी शक्ति हुआ करती थी। 1309 में जब क्रूर खिलजी ने देवगिरि को जीतने के मनसुबे से चढाई करी तब  देवगिरि साम्राज्य के सम्राट महाराजा रामचंद्र यादव थे। देवगिरि पर...

वैदिक वर्ण व्यवस्था

यदुकुल का सर्वण मात्र ही सभी पापों से मुक्त करने वाला है । #भगवत_गीता से उद्धरित। वेद और पुराणों के हिसाब से पहले तल पर #वैदिक_क्षत्रिय अर्थात #यदुवंश | #ब्राह्मणों को दूसरे तल पे रखा गया तीसरे तल पर #क्षत्रिय चौथे तल पर #वैस्य पांचवे ताल पर #सूद्र छठवें ताल पर #अछूत #इनके कामों से नही इनके जन्म से यह निर्धारित है। कोई अछूत क्षत्रिय तो हो सकता है लेकिन वैदिक नही उसी तरह कोई ब्राह्मण अस्त्र धारण करे तब भी वह वैदिक क्षत्रिय नही हो सकता । अर्थात ब्राह्मण से लेके अछूत तक सिर्फ यदुवंन्श को ही लक्ष्य बनाकर उसको #खत्म करना चाहेंगे । इन सब की वर्ण कर्मों से बदल जाएगी कोई अछूत से ब्राह्मण बन जाएगा कोई ब्राह्मण अछूत ,लेकिन वैदिक क्षत्रियों का वर्ण नही बदलता । यदुवंश को खुद को वैदिक क्षत्रिय कहने के ऊपर सिद्ध है कि वह वेदों में वर्णित कुलों का अंश है , और यह बात #गीता में जोर देते हुवे परमब्रम्ह ने कह दिया है । शक्ति के साथ पवित्र होने की वजह से यह सबसे उच्चतम कुल है मनुष्य का । देवरूप धरती में धारण करे हुवे देवता हैं  #यदुकुल के सभी जन । जय #जगन्नाथ जय यदुवन्श

Ahir Regiment अहीर_रेजिमेंट

*#अहीर_रेजिमेंट_क्यों_जरुरी_है ?*  (सभी यादव भाईयो से अनुरोध है कि पूरा पोस्ट पढ़े और शेयर करे) • बंधुओ मै आज फौज में अहीर (यादव ) रेजिमेंट की क्या जरुरत है और इस के क्या फायदे हैं , उस के बारे में सब ग़लतफहमी दूर करने का प्रयास इस लेख के ज़रिये कलम से कर रहा हूँ – • फौज ( थल सेना ) में सिपाहियों (अफसरों और क्लर्क की नहीं )ज्यादातर भर्ती (रिक्रूटमेंट ) जाति /क्षेत्र /मज़हब के आधार पर ही होती हैi सन 1857 के संग्राम के बाद अंग्रेजो ने सोचा की अगर भारत को गुलाम बनाये रखना है तो एक ऐसी फौज खड़ी करनी पड़ेगी जिसकी निष्ठा सिर्फ उसकी जाति /क्षेत्र /धर्म पर हो न की भारत के प्रति i और इस दिशा में उन्होंने जाति/क्षेत्र और धर्म आधारित रेजिमेंट बना दी i आज फौज में तीन मुख्य लड़ने वाले अंग है – इन्फेंट्री , तोपखाना और टैंक (कैवेलरी ) – और इन तीनो अंगो और इंजिनियर विंग में तक़रीबन सारी भर्ती जाति /क्षेत्र /धर्म के आधार पर होती है i उदाहरण के लिए जैसे गढ़वाल रेजिमेंट है – गढ़वाल रेजिमेंट में सिर्फ गढ़वाली ही भर्ती किये जातें हैं (गढ़वाल उत्तराखण्ड राज्य का एक क्षेत्र है ) और डोगरा रेजिमेंट ...

Why Gwalvanshi Yadavas Have Not Gotra

ग्वालवंश यदुवंशियों की एक मुख्य साखा है | गवालवंश के तीन सबसे महानतम राजवाड़े हैं | एक नेपाल में दूसरा गुप्त साम्राज्य | कोई कोई इन बातों को नही मानेगा लेकिन डीप स्टडी के बाद वह समझ जाएगा | वैसे अभी मैं सिर्फ एक बात को केंद्र बनाकर आपको सच से अवगत करा दूँ | गवालवंश साखा में गोत्र क्यों नही हैं ? इसके लिए आपको भागवत पुराण पढ़ने की जरूरत होगी | लेकिन मैं यहाँ आपको उस स्टोरी से अवगत करा दूँ जो विश्वविख्यात है एक बार ब्रम्हा जी ने कृष्ण को भगवान् अर्थात सुप्रीम गॉड न मानने की गलती करी , और उनकी परीक्षा लेने की सोची और कृष्ण जब खेल रहे थे वृंदावन में तब ब्रम्हा ने उनके सभी ग्वाल बालों जो की देवताओं के रूप थे उन्हें वहां से ब्रम्हा लोक ले गए | ब्रम्हा के इस काम के कारण कृष्ण ने खुद को ही सभी ग्वाल में रूप धारण किया , और ऐसा दिखाया जैसे कुछ हुवा ही नही | कुछ समय बीत जाने पर ब्रम्हा ने सोचा जरा देखू क्या कर रहा है वो बालक तब उसने देखा की जो ग्वाल वृन्दावन में हैं वही ब्रम्ह लोक में भी | ब्रम्हा ने बहुत सोचा फिर अपनी गलती का अहसास हुवा । और वो कृष्ण भगवान् के कमल चरणों में आ गिर...

हिन्दु धर्म की धर्मांधतापूर्ण नीति

हिन्दु धर्म की धर्मांधतापूर्ण नीति के चलते मेवों को हिन्दु ना अपनाने के कारण हमारी नाक के नीचे मुस्लिम धर्म की ओर अग्रसर होता मेवात धर्मांधता की चादर ओढ़े हिन्दुवाद की देन है ! जो धर्मांधता में बंधकर खड़ा तमाशा देख रहा है ! मैंने मेवात के इतिहास को काफी खंगाला है मुझे जो तथ्य यहा के मिले वो मैं यहा आप सब के साथ साझा कर रहा हूँ ! मेवात में मेवों के पूर्वज मूल रूप से हिन्दु रहे है ! मेवों में 12 पाल है 6 पाल यादवों की है 6 पालों में मीणा, गुज्जर, जाट आदि है इसे जानने के लिए यह जरूरी है कि जब 14वी शताब्दी के मध्य तुहिन गढ़ राज्य के वंशज यादव राजा सांभर पाल मौजूदा मेवात में राज करते थे ! फिरोजशाह तुगलक 1351ई० में बादशाह बना तो उसने अपने विजय अभियान को जब मौजूदा मेवात की तरफ किया तो सांभर पाल व उनके पुत्रों तथा इनकी सेना ने घोर युद्ध करके फिरोजशाही सेना के हजारों सिपाहियों को साहबी के ठण्ड़े रेत में दफन कर दिया आज भी उनकी कबरें कोट कासिम के आस-पास दूर-दूर तक बिखरी पड़ी है लेकिन इस युद्ध में सांभर पाल के दो पुत्र घायल होने से पकड़े गए शाही सेना कई दिनों तक अपने साथियों की सड़ी लाशों क...

Indo-Arya Yadu & Krishn dynasty कृष्ण के पूर्वज यदु को आर्य घोषित कर दिया तो कृष्ण भी आर्य हुए

अहीर प्रमुखतः एक हिन्दू भारतीय जाति समूह है । परन्तु कुछ अहीर मुसलमान भी हैं  और बौद्ध तथा कुछ सिक्ख भी हैं । और ईसाई भी  । भारत में अहीरों को यादव समुदाय के नाम से भी पहचाना जाता है, तथा अहीर व यादव या राव साहब ये सब यादवों के ही विशेषण हैं। हरियाणा में राव शब्द यादवों का विशेषण है। ________” यहूदीयों की हिब्रू बाइबिल के सृष्टि-खण्ड नामक अध्याय  Genesis 49: 24 पर --- अहीर शब्द को जीवित ईश्वर का वाचक बताया है । --------------------------------------------------------------- ___The name Abir is one of The titles of the living god  for some reason it,s usually translated(  for some reason all god,s     in Isaiah 1:24  we find four names of The lord in rapid  succession as Isaiah Reports " Therefore Adon - YHWH - Saboath and Abir ---- Israel declares... ------------------     --------------------- Abir (अभीर )---The name  reflects protection more than strength although one obviously -- has to be Strong To be an...